Site icon Uprising Bihar

जानिए मलमास क्या है इसे मलमास क्यों कहा जाता है और यह कितने दिनों तक चलता है

मलमास

मलमास

क्या है मलमास

इसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। ज्योतिषों की गणना के मुताबिक हर तीन साल के बाद एक माह बढ़ जाता है। हिंदू धर्म में तारीखों की गणना दो विधि से की जाती है। प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी एक अतिरिक्त महीने को अधिकमास यानि मलमास का नाम दिया गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

अधिमास क्यों कहा जाता है

भारतीय हिंंदू गणना में यानि सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष में तीन साल बाद दोनों में करीब एक महीने का अंतर आ जाता है। इसी एक महीने के अंतर को अधिमास कहा जाता है

मलमास क्यों कहा जाता है

इस एक महीन में मलमास में शुभ कार्य वर्जित होता है। जैसे शादी-विवाह, गृहप्रवेश आदि की मनाही होती है। मान्यता के मुताबिक इसे शुरुआत में मलिन माह कहा जाता था जिसे बाद में मलमास कहा जाने लगा।

Read more – Sawan 2023 Marriages: सावन में क्यों नहीं होती शादियां?

That’s why marriage is forbidden

पुरुषोत्तम मास क्यों कहते हैं

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक कहा जाता है कि जब ऋषि मुनियों ने समय की गणना की और एक महीना अतिरिक्त निकला। ऐसे में सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष में संतुलन बैठाना मुश्किल हो रहा था। ऋषियों ने देवताओं से इस एक महीने का स्वामी बनने का आग्रह किया तो कोई भी बनने को तैयार नहीं हुए। जिसके बाद ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से इस अधिक मास का भार अपने ऊपर लेने का आग्रह किया। तो भगवान विष्णु ने इसे स्वीकार कर लिया और इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा।

मलमास का धार्मिक महत्व

मलमास मंत्र जानिए

गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपरूपिणम्। गोकुलोत्सवमीशानं गोविन्दं गोपिकाप्रियम्।।

ऐसी मान्यता है कि इस मंत्र का जप करते समय पीले वस्त्र धारण करने चाहिए, अत्यंत लाभ प्राप्त होता है। इसके साथ ही पूजा तथा हवन के साथ दान करना भी लाभकारी माना गया है।

ऐतरेय ब्राह्रण के मुताबिक इस महीने में कोई भी शुभ एवं मंगल कार्य करने की मनाही होती है। यानि मलमास के महीने में  शादी-ब्याह, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। वहीं, अग्नि पुराण के अनुसार मलमास  में मूर्ति पूजा–प्रतिष्ठा, यज्ञदान, व्रत, वेदपाठ, उपनयन, नामकरण आदि वर्जित है, लेकिन इस अवधि में राजगीर सर्वाधिक पवित्र माना जाता है । लेकिन इस दौरान राजगीर में सभी 33 करोड़ देवी देवता मौजूद रहते हैं ऐसे में राजगीर में जाकर स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है । साथ ही चर्म रोग, कुष्ठ रोग जैसे व्याधियां भी नष्ठ हो जाती है ।

Read More – मलमास में भगवान शिव पर जलाभिषेक करें या नहीं,जाने सम्पूर्ण जानकारी |

मलमास में भगवान शिव पर जलाभिषेक करें या नहीं

उम्मीद है आपको यह लेख पसंद आया हो इसे पढ़ने के लिए धन्यवाद, ऐसे ही आर्टिकल पढ़ते रहने के लिए जुड़े रहें Uprising Bihar के साथ। यह लेख पसंद आया हो तो इसे लाइक और शेयर जरूर करें।

Exit mobile version