पटना साहिब गुरुद्वारा
पटना सिटी, जिसे लोकप्रिय रूप से पटना साहेब या पटना साहिब के नाम से जाना जाता है, एक शहर है और भारत के बिहार राज्य के पटना जिले के 6 उप-मंडलों (तहसील) में से एक है।

पटना साहिब गुरुद्वार का इतिहास
पटना साहिब गुरूद्वारे का इतिहास बताता हैं कि यह वह स्थान है जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म वर्ष 1666 में हुआ था। सिखों के दसवे गुरु आनंदपुर जाने से पहले कई वर्षो तक इस स्थान पर रूखे थे। जिसके परिणामस्वरुप यह स्थान गुरु गोविन्द सिंह जी के निवास स्थान के रूप में भी जाना गया है।
वर्ष 1839 में इस ईमारत में आग लगने की वजह से यह ध्वस्त हो गई थी, जिसका निर्माण वर्ष 1666 में महाराजा रणजीत सिंह के द्वारा करवाया गया था। माना जाता हैं कि सिखों के पहले गुरु (गुरु नानक) ने इस स्थान की यात्रा की। सिखों के नौवे गुरु तेज बहादुर ने भी अपनी पटना यात्रा के दौरान इस स्थान पर कुछ समय व्यतीत किया था।
पटना साहिब गुरुद्वारा किसने बनवाया
इसका निर्माण सिख साम्राज्य के पहले महाराजा महाराजा रणजीत सिंह (1780-1839) द्वारा किया गया था, जिन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में कई अन्य गुरुद्वारों का भी निर्माण कराया था। पटना साहिब या तख्त श्री हरमंदिरजी साहिब का वर्तमान मंदिर 1950 के दशक में बनाया गया था।
पटना साहिब में किसका जन्म हुआ था
पटना साहिब या श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब पटना शहर के पास पटना सिटी में स्थित सिख आस्था से जुड़ा यह एक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है। यहाँ सिखों के दसवें गुरु श्री गोबिन्द सिंह का जन्मस्थान है। गुरु गोविन्द सिंह का जन्म 22 दिसम्बर 1666 शनिवार को माता गुजरी के गर्भ से हुआ था।
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पटना का गुरुद्वारा किसके लिए और क्यों प्रसिद्ध है
पटना साहिब गुरुद्वारा सिख समुदाय के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। इसी जगह पर सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था और उन्होंने अपने जीवन के दस साल बिताए थे। हरमंदिर तख्त श्री पटना साहिब को पटना साहिब गुरुद्वारा के नाम से भी जाना जाता है।
गुरु गोविन्द घाट या गुरूद्वारा कंगन घाट
यह गुरूद्वारा तख्त हरमंदिर पटना साहिब गुरूद्वारे के उत्तर की ओर थोडी सी दूरी पर है। और गंगा के किनारे पर है। यहां पर गुरु गोविन्द सिंह जी गंगा के किनारे पर खेलने आया करते थे। और अपने साथियों के साथ यहां गतका बाज, तीर अंदाजी तथा गुलेल के निशानो का अभ्यास किया करते थे। और कश्ती भी चलाया करते थे। इसके अलावा यहाँ आकर गंगा में तैराकी भी किया करते थे।
गुरूद्वारा बाललीला

पटना साहिब में यह गुरूद्वारा भी तख्त हरमंदिर साहिब गुरूद्वारे के पास ही स्थित है। यहां पर भी गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने बचपन में चमत्कार किए थे। इस गुरूद्वारे को“मैनी संगत”भी कहा जाता है। फतहचन्द मैनी एक स्थानीय राजा था। उनकी कोई संतान नहीं थी। गोविंद राय जी अपने साथियों के साथ खेलते खेलते प्रतिदिन उसके महल में जाते थे। रानी प्रतिदिन भगवान के आगे गोविंद राय जैसा बालक संकल्प करती हुई प्रार्थना करती थी।
एक दिन गोविंद राय जी अंतर्यामी रानी की गोद में जाकर बैठ गए, और मां कहकर पुकारा। रानी तृप्त हुई और उन्होंने गोविंद जी को धर्मपुत्र स्वीकार कर लिया। एक दिन गोविन्दा राय जी को खेलते खेलते भूख लगी थी। तब रानी ने उबले हुए चने तथा पुरी खिलाई। धर्मपुत्र बनने के नाते गुरू गोविंद सिंह जी ने राजा फतहचन्द मैनी परिवार को हमेशा के लिए अमर दान दिया।
इस गुरूद्वारे में आज भी चने का प्रसाद मिलता है। गुरूद्वारा बहुत ही सुंदर ढंग से बनाया गया है। यहां दर्शनीय वस्तुओं मे खीमखाप का जूता जो गुरूजी बाल अवस्था मे पहना करते थे, करौंदे का वृक्ष, जिसके बारें मे कहा जाता है कि यहा गुरूजी ने दतवन गाडी थी, उसी से यह वृक्ष हो गया, और आज भी हरा भरा रहता है।
गुरूद्वारा गुरू का बाग
पटना साहिब मे यह गुरूद्वारा तख्त हरमंदिर साहिब गुरूद्वारे से 6-7 किमी पूरब की ओर स्थित है। यहां पर स्थानीय नवाब रहीम बक्श तथा करीम बक्श दो भाइयों का बाग था। जोकि बिल्कुल सूखा पडा था। श्री गुरु तेगबहादुर जी ने आसाम से वापिस लौटते हुए, इस बाग में आकर डेरा डाला था। गुरू जी के डेरा डालते ही सूखा बाग हरा भरा हो गया। जब दोनों भाईयो को इसकी सूचना मिली कि किसी संत महापुरुष के आने पर बाग हरा भरा हो गया है, तो वे दोनों भाई अपने दरबारियों के साथ वहां पहुंचे, और उन्होंने यह बाग गुरूजी के नाम कर दिया।

गुरूद्वारा गाय घाट
पटना साहिब के दर्शनीय स्थलों में गुरूद्वारा गाय घाट भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह गुरूद्वारा तख्त हरमंदिर साहिब से लगभग 5-6 किमी पश्चिम की ओर स्थित है। तख्त हरमंदिर साहिब से प्रथम स्थान यह गुरूद्वारा गाय घाट बडी संगत है। प्रथम गुरु नानकदेव जी और गुरु तेगबहादुर जी का पहला गुरूद्वारा है। यह गाँव विशम्भरपुर था। जयतामल भगत, गुरू नानकदेव जी का शिष्य था। उसके पास नानकदेव जी आकर रहे थे, उस समय शिष्य भक्त जयतामल की उम्र 350 वर्ष की थी। भक्त जयतामल ने गुरू नानकदेव जी से प्रार्थना की, कि मै इतना वृद्ध हो गया हूँ, कि अपना क्रियाक्रम भी नहीं कर सकता, मुझे मुक्ति देने की कृपा करे।
गुरु गोबिंद सिंह की जयंती हर साल दिसंबर में मनाई जाती है
यहां सभी आगंतुकों को लंगर या मुफ्त भोजन सेवा प्रदान की जाती है और लंगर सेवाओं में स्वयं सेवा करने के लिए आगंतुकों का भी स्वागत किया जाता है क्योंकि इसे भगवान को भेंट माना जाता है. प्रकाश पर्व या गुरु गोबिंद सिंह की जयंती हर साल दिसंबर में मनाई जाती है जो इस जगह के प्रमुख आकर्षणों में से एक है.
ठहरने की व्यवस्था
गुरूद्वारा तख्त हरमंदिर साहिब मे निःशुल्क तीन दिन ठहरने की व्यवस्था है। यहां लगभग 200 कमरे है। पटना साहिब गुरूद्वारा रूम बुकिंग, पटना साहिब आनलाइन रूम बुकिंग के लिए आप takhat patna sahib.in पर जाकर ऑनलाइन रूम बुक कर सकते है। इसके यहां यहां काफी संख्या में होटल और धर्मशालाएं है भी है। पटना साहिब में भोजन के लिए गुरू के लंगर की भी अच्छी सुविधा है।
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