जबकि कुछ इसे मकबरा के रूप में देखते हैं। इस लेख में, हम इस विवाद को गहराई से जांचेंगे और कोशिश करेंगे कि क्या ताजमहल के तहखाने का असली रहस्य क्या हो सकता है।

ताजमहल भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित एक ऐतिहासिक और सौंदर्य परिसर है, जो विश्व धरोहर स्थल के रूप में यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त है। इसमें मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में बनवाया था। ताजमहल का निर्माण एक प्यार की कहानी के रूप में जाना जाता है, लेकिन क्या यह सिर्फ़ एक प्रेम की निष्कर्षि ही है या कुछ और भी? ताजमहल के तहखाने के बारे में विवादित मत व्यक्त किए गए हैं, कुछ लोग इसे एक शिवालय के रूप में मानते हैं जबकि कुछ इसे मकबरा के रूप में देखते हैं। इस लेख में, हम इस विवाद को गहराई से जांचेंगे और कोशिश करेंगे कि क्या ताजमहल के तहखाने का असली रहस्य क्या हो सकता है।
ताजमहल का निर्माण और इतिहास

ताजमहल का निर्माण 1632 ईसा पूर्व से लेकर 1653 ईसा पूर्व तक चला। इसे मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में बनवाया था। ताजमहल का निर्माण एक अत्यंत महंगे पत्थर, सफेद मार्बल से किया गया था और इसकी सजावट में पूरे विश्व के विशेषज्ञ शिल्पकारों की दक्षता का प्रदर्शन होता है। ताजमहल का निर्माण एक शानदार वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है और यह भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतीक माना जाता है।
ताजमहल के तहखाने का रहस्य
ताजमहल के तहखाने के बारे में विवादित मत व्यक्त किए गए हैं। कुछ लोग इसे एक शिवालय के रूप में मानते हैं, जबकि कुछ इसे मकबरा के रूप में देखते हैं। विवाद का मुख्य कारण ताजमहल के निर्माण काल में यह वाद चल रहा था कि क्या मुग़ल साम्राज्य ने हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया और उनके स्थान पर मकबरे बनवाए। इस संदर्भ में, ताजमहल के तहखाने को भी इस वाद का हिस्सा माना जा रहा है।

ताजमहल के तहखाने: शिवालय का सिद्धांत
कुछ विशेषज्ञ और ऐतिहासिक अनुसंधानकर्ता ताजमहल के तहखानों को एक शिवालय के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि ताजमहल का निर्माण हिंदू भाषा की जिज्ञासा और मुग़ल साम्राज्य की रूपरेखा का परिणाम है, जिसमें विभिन्न संस्कृति और धर्म के प्रतीकों का मेल है। उनका यह तर्क है कि ताजमहल के तहखानों में विभिन्न हिन्दू धार्मिक प्रतीक जैसे कि मूर्तियाँ, ज्योतिषीय प्रतीक आदि की पहचान की जा सकती है, जो शिव शक्ति की पूजा के संकेत के रूप में समझे जा सकते हैं।
इस सिद्धांत के प्रमुख वक्ताओं में से एक डॉ. पी. सी. बिस्वस स्थित हैं, जिन्होंने अपनी पुस्तक “ताजमहल का शिव रहस्य” में इस सिद्धांत को विस्तार से प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, ताजमहल का निर्माण मुग़ल साम्राज्य के पूर्वाधिकृत भूमि पर हुआ था, जिसमें एक प्राचीन शिव मंदिर खड़ा था। वे मानते हैं कि ताजमहल के तहखाने वास्तव में उस मंदिर के हिस्से हैं, जो सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी की याद में मकबरे के रूप में बनवाया।
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ताजमहल के तहखाने: मकबरे का सिद्धांत
दूसरी ओर, कई ऐतिहासिक अनुसंधानकर्ता ताजमहल के तहखानों को एक मकबरे के रूप में मानते हैं। इस सिद्धांत के प्रमुख प्रतिपादक में से एक डॉ. एएस. भूत कुलकर्णी हैं, जो अपनी पुस्तक “ताजमहलच्या गुप्तयोगी रहस्य” में इस दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हैं। उनका मानना है कि ताजमहल के निर्माण के पीछे मकबरे की योजना थी, और ताजमहल के तहखाने वास्तव में उस मकबरे के हिस्से हैं, जो मुमताज़ के शव की देखभाल और संज्ञान के लिए बनवाए गए थे।
समापन
ताजमहल के तहखानों के रहस्य का विवाद आज भी जारी है और विशेषज्ञों के बीच मतभेद चलते रहते हैं। ताजमहल का निर्माण एक अद्वितीय कला और शिल्प का प्रतीक है, जो दुनियाभर में अपनी खूबसूरती और महत्वपूर्णता के लिए प्रसिद्ध है। ताजमहल के तहखानों का रहस्य आज भी समाधान की प्रतीक्षा करता है, और आने वाले समय में यह रहस्य उन्हें ताजमहल के महत्वपूर्ण अस्पृश्य पहलुओं को समझने में मदद कर सकता है।