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क्या आपको पता है तिरंगे में अशोक चक्र का रंग नीला ही क्यों होता है ?

भारत का राष्ट्रीय ध्वज तीन रंगों का होता है, जिसे तिरंगा भी कहा जाता है। इसमें तीन रंग यानी सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी मौजूद होती है। इसमें केसरिया रंग ‘त्याग और बलिदान’, सफेद रंग ‘शांति, एकता और सच्चाई‘ वहीं हरा रंग ‘विश्वास और उर्वरता‘ का प्रतीक है। तिरंगे के बीचो-बीच बने नीले रंग के चक्र का भी अपना महत्व होता है, जिसे अशोक चक्र भी कहा जाता है।

नीले रंग का अशोक चक्र अशोक की राजधानी के सारनाथ में स्थापित शेर के स्तंभ पर बना हुआ है। इसका व्यास तिरंगे के बीच सफेद रंग की पट्टी की चौड़ाई के बराबर होता है, जिसमें 24 तीलियां होती हैं। दरअसल, सम्राट अशोक के बहुत से शिलालेखों पर एक चक्र बना हुआ दिआई देता है, इसे वहीं से लिया गया है।

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वहीं इसके रंग के बारे में बात की जाए, तो कहा गया है कि नीला रंग आकाश, महासागर और सार्वभौमिक सत्य को दर्शाता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय ध्वज की सफेद पट्टी के बीच में नीले रंग का अशोक चक्र स्थित होता है। वहीं इसमें बनी 24 तीलियां मनुष्य के 24 गुणों को दर्शाती हैं। 

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इसके अलावा तिरंगे को लेकर एक और खास बात ये है, कि राष्ट्रीय ध्वज के लिए अशोक चक्र से पहले चरखे को चुना गया था। लेकिन जब राष्ट्र ध्वज के निर्माताओं ने इसका अंतिम रूप तैयार किया, तो झंडे के बीच में चरखे को हटाकर इस अशोक चक्र को स्थापित किया गया। जिसके बाद 22 जुलाई 1947 के दिन संविधान सभा ने इस तिरंगे को देश के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया था।

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