Bichiya designs
बिछिया पहनना सिर्फ सुहाग का ही नहीं, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व भी रखता है!
पैरों में बिछिया पहनने का रिवाज भारतीय संस्कृति में सदियों से चला आ रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिछिया पहनने के पीछे सिर्फ सुहाग का ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व भी छिपा हुआ है?
आज हम आपको बताएंगे कि कितने पंजों में बिछिया पहननी चाहिए और उसके पीछे क्या कारण है।
कितने पंजों में पहनें बिछिया?

हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं को सिर्फ एक ही अंगूठे में बिछिया पहननी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अंगूठे में शनिदेव का वास होता है और बिछिया पहनने से शनिदेव की कृपा बनी रहती है। साथ ही, अंगूठे में बिछिया पहनने से पैरों की नसों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
हालांकि, कुछ महिलाएं दो या तीन पंजों में भी बिछिया पहनती हैं। ऐसा करना कोई गलत नहीं है, लेकिन ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक ही पंजे में बिछिया पहनना ज्यादा लाभकारी माना जाता है।
बिछिया पहनने के वैज्ञानिक फायदे
बिछिया पहनने से पैरों के रक्त संचार को बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे पैरों में दर्द और सूजन की समस्या कम होती है।

बिछिया के घुंघरू की आवाज से दिमाग को शांति मिलती है और तनाव कम होता है।
बिछिया में इस्तेमाल होने वाली धातु, जैसे चांदी, पैरों के एक्यूप्रेशर पॉइंट्स को उत्तेजित करती है, जिससे शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।
ज्योतिषीय नजरिए से बिछिया का महत्व
ज्योतिष शास्त्र में बिछिया को शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि बिछिया पहनने से सुहागिन महिलाओं का वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और उन्हें संतान सुख प्राप्त होता है।

बिछिया शनिदेव के प्रकोप से भी बचाती है। शनिदेव को पैरों का कारक ग्रह माना जाता है और बिछिया पहनने से उनकी कृपा बनी रहती है।
तो अगली बार जब आप बिछिया पहनें, तो सिर्फ सुहाग का ही नहीं, बल्कि उसके वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व को भी याद रखें।
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टिप्स:
- बिछिया हमेशा शुभ मुहूर्त में ही पहननी चाहिए।
- टूटी हुई या खराब बिछिया को तुरंत बदल देना चाहिए।
- सोने से पहले बिछिया उतार देनी चाहिए।
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