
दोस्तो सरदार वल्लभ भाई को तो आप सब जानते ही होंगे, उन्होंने हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। उनका जन्म 31 अक्टूबर, 1875 में गुजरात के नडियाद में हुआ था। वह हमारे देश के प्रथम उप-प्रधानमंत्री और ग्रह मंत्री भी थे। यहां तक कि उनके स्वतंत्रता में योगदान के लिए उन्हें लौह पुरूष की उपाधि भी दी गई थी। 1947 की स्वतंत्रता के बाद उन्होंने भारत को संग्रहित करने में भी अहम भूमिका निभाई थी। जिसमें उन्होने कुल 562 रियासतों को एकत्रित कर भारत में विलय करवाया था। और अंततः उनका निधन 15 दिसंबर, 1950 में मुंबई में हुआ था। तो आइए जानते है उनके दिए गए कुछ motivational quotes के बारे में…
1. अगर हमारी करोड़ों की दौलत भी चली जाए या फिर हमारा पूरा जीवन बलिदान हो जाए तो भी हमें ईश्वर में विश्वास और उसके सत्य पर विश्वास रखकर प्रसन्न रहना चाहिए।

2. आलस्य छोडिये और बेकार मत बैठिये क्योंकि हर समय काम करने वाला अपनी इन्द्रियों को आसानी से वश में कर लेता है।

3. एकता के बिना जनशक्ति शक्ति नहीं है, जब तक उसे ठीक तरह से सामंजस्य में ना लाया जाए और एकजुट ना किया जाए।

4. किसी राष्ट्र के अंतर में स्वतन्त्रता की अग्नि जल जाने के बाद वह दमन से नहीं बुझाई जा सकती स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद भी यदि परतन्त्रता की दुर्गन्ध आती रहे तो स्वतन्त्रता की सुगंध नहीं फैल सकती।

5. दुःख उठाने के कारण प्राय: हममें कटुता आ जाती है, द्रष्टि संकुचित हो जाती है और हम स्वार्थी तथा दूसरों की कमियों के प्रति असहिष्णु बन जाते हैं शारीरिक दुःख से मानसिक दुःख अधिक बुरा होता है।

6. आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आँखों को क्रोध से लाल होने दीजिये, और अन्याय का सामना मजबूत हाथों से कीजिये।

यह भी पढ़ें- ऐसे लाए जीवन में खुशियां, Happy Life Tips
7. यहाँ तक कि यदि हम हज़ारों की दौलत गवां दें, और हमारा जीवन बलिदान हो जाए, हमें मुस्कुराते रहना चाहिए और ईश्वर एवं सत्य में विश्वास रखकर प्रसन्न रहना चाहिए।

8. जब तक हमारा अंतिम ध्येय प्राप्त ना हो जाए तब तक उत्तरोत्तर अधिक कष्ट सहन करने की शक्ति हमारे अन्दर आये, यही सच्ची विजय है।

9. जो तलवार चलाना जानते हुए भी तलवार को म्यान में रखता है, उसी की अहिंसा सच्ची अहिंसा कही जाएगी. कायरों की अहिंसा का मूल्य ही क्या. और जब तक अहिंसा को स्वीकार नहीं जाता, तब तक शांति कहाँ!

10. ईश्वर का नाम ही (रामवाण) दवा है. दूसरी सब दवाएं बेकार हैं. वह जब तक हमें एस संसार में रखे, तब तक हम अपना कर्तव्य करते रहें. जानेवाले का शोक न करें, क्योंकि जीवन की डोर तो उसी के हाथ में है. फिर चिंता की क्या बात. याद रहे कि सबसे दुखी मनुष्य में भगवान का वास होता है. वह महलों में नहीं रहता.

11. कल किये जानेवाले कर्म का विचार करते-करते आज का कर्म भी बिगड़ जाएगा. और आज के कर्म के बिना कल का कर्म भी नहीं होगा, अतः आज का कर्म कर लिया जाये तो कल का कर्म स्वत: हो जाएगा.

12. मनुष्य को ठंडा रहना चाहिए, क्रोध नहीं करना चाहिए. लोहा भले ही गर्म हो जाए, हथौड़े को तो ठंडा ही रहना चाहिए अन्यथा वह स्वयं अपना हत्था जला डालेगा. कोई भी राज्य प्रजा पर कितना ही गर्म क्यों न हो जाये, अंत में तो उसे ठंडा होना ही पड़ेगा.

यह भी पढ़ें- स्वामी विवेकानंद के 10 अनमोल विचार आपको जीवन में हौसला देंगे
13. अधिकार मनुष्य को अँधा बना देता है. इसे हजम करने के लिए जब तक पूरा मूल्य न चुकाया जाये, तब तक मिले हुए अधिकारों को भी हम गंवा बैठेंगे.

14. हर जाति या राष्ट्र खाली तलवार से वीर नहीं बनता. तलवार तो रक्षा-हेतु आवश्यक है, पर राष्ट्र की प्रगति को तो उसकी नैतिकता से ही मापा जा सकता है.

15. संस्कृति समझ-बूझकर शांति पर रची गयी है. मरना होगा तो वे अपने पापों से मरेंगे. जो काम प्रेम, शांति से होता है, वह वैर-भाव से नहीं होता.

तो दोस्तो उम्मीद है कि आपको यह विचार पसंद आए हो, पोस्ट पर लाइक और कमेंट जरूर करें। और ऐसी ही जानकारी के लिए जुड़ें रहे मुझसे…