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आज की कहानी एक ऐसे युवक की है, जिसने अपनी मेहनत, समर्पण और निष्ठा से अपने लक्ष्यों को पूरा किया और सफलता प्राप्त की। ” यह कहानी हैं , सचिन कुमार ( सत्तूज़ )“।
मानव जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा सफलता है। सफलता की प्राप्ति के लिए कठिनाइयों का सामना करना आम बात है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह काफी अधिक कठिन होता है क्योंकि उनके पास सामान्य साधनों की कमी होती है।
बचपन की कठिनाइयों में अद्भुत सपना :
सचिन कुमार, जिन्हें परिवार और दोस्त लोग सत्तूज़ के नाम से पुकारते थे, एक छोटे से गांव में पैदा हुए थे। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें मनोबल से भर दिया था। सचिन के मन में बचपन से ही एक ख्वाब था – क्रिकेट के मैदान में खुद को दिखाने का। वे छोटे से ही बड़े खिलाड़ी बनने की तमन्ना रखते थे, लेकिन उनके पास क्रिकेट खेलने के लिए उपकरण नहीं थे।
संघर्ष की शुरुआत :
शुरुआत में जब सचिन ने अपने रिश्तेदार-दोस्तों और घरवालों को सत्तू का स्टार्टअप शुरू करने के बारे में बताया, तो उनमें से कइयों ने सचिन का मजाक उड़ाया। कहते थे, ‘सत्तू का कारोबार भी कोई आइडिया है।’
सचिन कहते हैं, जब मैंने लोगों के कमेंट्स को इग्नोर करना शुरू किया और ठान लिया कि सत्तू का ही स्टार्टअप करना है, तो कुछ दोस्तों और बाद में घरवालों ने भी सपोर्ट किया। बिहार में स्टार्टअप शुरू करने को लेकर सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि यदि आप किसी बड़ी कंपनी से जुड़ते हैं, तो ना सिर्फ परिवार सपोर्ट करता है, बल्कि बैंक भी लोन दे देता है। लेकिन सचिन कुमार ( सत्तूज़ ) के मामले में ऐसा नहीं था ।
साल 2018 के 14 अप्रैल की बात है। इस दिन नॉर्थ इंडिया में सतुआनी ( सतुआन -बिहार में एक पर्व है ) मनाया जाता है। लोग खासतौर से सत्तू खाते या पीते हैं। हमने इसे मार्केट में लॉन्च कर दिया, लेकिन स्टार्टअप को बूस्ट करने के लिए अधिक फंड की जरूरत थी।
2019 की बात है। हम जहां भी जाते थे, साथ में सत्तू का पैकेट जरूर लेकर जाते थे। कोलकाता के एक सेमिनार में गया था। हमने वहां एक एंजेल इन्वेस्टर को ग्लास में सत्तू घोलकर पिलाया। पीते ही वो शॉक्ड हो गए कि सत्तू को ऐसे भी बनाया जा सकता है उन्होंने कहा, ‘क्या चाहिए।’ हमने उनसे फंड देने की रिक्वेस्ट की।
निष्ठा का मार्ग :
सफलता पाने के लिए निष्ठा और स्थायिता का महत्वपूर्ण भूमिका होता है। सचिन ने भले ही अपनी गांव के कम माध्यमों से आए थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और निरंतर अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ते रहे। उनकी निष्ठा ने उन्हें क्रिकेट के मैदान में उच्च स्तर पर पहुँचाने में मदद की।
मानसिक तंत्र का महत्व :

सचिन ने जब 2018 में ‘सत्तूज’ की शुरुआत की थी, तो सालाना 10 लाख का ही कारोबार कर पा रहे थे। वो कहते हैं, कोरोना के दौरान काफी नुकसान भी हुआ, लेकिन हर महीने 10 लाख का बिजनेस हो रहा है। एक डिब्बे में 6 सैशे पैक्ड होते हैं, अलग-अलग फ्लेवर के मुताबिक इसकी कीमत 60 रुपए से लेकर 120 रुपए तक होती है।
जिस वक्त हमारी उनसे बातचीत हो रही है, सचिन के क्लाउड किचन में एक डिलिवरी बॉय लिट्टी-चोखा के ऑर्डर को रिसीव करने के लिए बैठा हुआ है।
शार्क टैंक के जजों के फीडबैक ने बिजनेस में पंख लगा दिए :
सत्तू से बनी खाने-पीने की चीजों को लेकर सचिन दिलचस्प किस्सा बताते हैं, 2020-21 में हमने शार्क टैंक इंडिया में अप्लाई किया था। वहां तीन राउंड में शूटिंग भी हुई, लेकिन फाइनल एपिसोड को टीवी पर नहीं दिखाया गया। हालांकि जजों ने जो फीडबैक दिया, उसने मेरे बिजनेस में पंख लगा दिए।
शार्क टैंक के जजों ने कहा, क्यों नहीं हम एंड प्रोडक्ट यानी कि सत्तू से बने प्रोडक्ट बेचें। इसके बाद हमने पटना में क्लाउड किचन की शुरुआत की। जोमैटे, स्विगी समेत दूसरे ई-कॉमर्स फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर कंपनी को लिस्ट कर लिट्टी-चोखा, सत्तू पराठा समेत कई सत्तू रिलेटेड प्रोडक्ट को 24×7 बेचना शुरू किया। अभी महीने में 500 के करीब ऑर्डर आ जाते हैं। आने वाले दिनों में हम बिहार के बाहर भी आउटलेट खोलने की प्लानिंग कर रहे हैं।
सचिन की मेहनत और समर्पण ने उन्हें उनकी लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने में मदद की। वे होशियारी से अपनी कौशल को सुधारते रहे और नए-नए तकनीकों का अध्ययन करते रहे। उन्होंने किसी भी अवस्था में हार नहीं मानी और हमेशा मेहनत करते रहे, जिससे उनकी स्टार्टअप की प्रगति हुई।
उनकी मेहनत, समर्पण, निष्ठा और मानसिक तंत्र की मजबूती ने उन्हें सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उन्होंने किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानी और हमेशा प्रेरित रहे। उनकी संघर्षों भरी कहानी हमें यह सिख देती है कि सफलता का मार्ग कभी भी आसान नहीं होता, लेकिन अगर हम मेहनत, समर्पण और निष्ठा से आगे बढ़ते रहें, तो हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं।
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यह कहानी हमें सिखाती है :
सचिन कुमार की यह कहानी हमें यह सिख देती है कि सफलता को पाने के लिए आवश्यकता है मेहनत, समर्पण, निष्ठा, मानसिक तंत्र की मजबूती और सही दिशा में प्रगति करने की क्षमता। हालांकि उनके पास सामान्य साधन नहीं थे, लेकिन उन्होंने इन सब कठिनाइयों का सामना करके अपनी सफलता की कहानी बनाई। उनकी यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर हम अपने लक्ष्यों के प्रति पूरी निष्ठा और समर्पण लेकर चलते हैं, तो हम किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं और सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकते हैं।
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