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क्यों चढ़ाना चाहिए शिवलिंग पर भादो में जल ?

शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए

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भादो के महीने में शिव जी पर किस प्रकार जल अर्पित करें और आखिर क्यों चढ़ाया जाता है शिवलिंग पर जल। इसकी गहराई में जाने से पहले जान लें की भादो का महीना कौनसा होता है। इस साल भाद्रपद २३ अगस्त , बुधवार से शुरू होकर २२ सितम्बर शुक्रवार तक समाप्त होगा।

भाद्रपद महीने में हिन्दू धर्म के बहुत सारे त्यौहार आते हैं. इस महीने में पड़ने वाले त्योहारों में जन्माष्टमी व गणेशोत्सव सबसे मुख्य त्यौहार हैं.

भाद्रपद महीने को भादो का महीना भी कहा जाता है. जो भी व्यक्ति इस माह में स्नान, दान और व्रत करता है उसके सभी पापों का नाश होता है. भाद्रपद के महीने को शून्य मास भी कहा जाता है, क्यों कि इस माह में लोक व्यवहार के कार्य वर्जित होते हैं.

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भाद्रपद महीने का महत्व-

शास्त्र में बताया गया है कि भाद्र का अर्थ कल्याण करने वाला होता है. मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद का महीना चातुर्मास के चार पवित्र महीनों में से दूसरा महीना होता है. भाद्रपद मास में स्नान, दान और उपवास करने से मनुष्य के जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस महीने में गलतियों को याद करके प्रायश्चित करना सर्वोत्तम होता है. भाद्रपद के महीने में घर निर्माण, शादी, सगाई, मुंडन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य शुभ कारी नहीं माने जाते हैं. इसलिए इस महीने में स्नान दान को सबसे उत्तम माना गया है.

शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद के महीने में कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है और साथ ही कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन पर भी निषेध बताया गया है. 

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इसलिए शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है जल

समुद्र मथने के बाद जो विष निकला उसे भगवान शंकर ने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम नीलकंठ महादेव पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी- देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का खास महत्व है

शास्त्र में बताया गया है कि भाद्र का अर्थ कल्याण करने वाला होता है. मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद का महीना चातुर्मास के चार पवित्र महीनों में से दूसरा महीना होता है. भाद्रपद मास में स्नान, दान और उपवास करने से मनुष्य के जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस महीने में गलतियों को याद करके प्रायश्चित करना सर्वोत्तम होता है.

भाद्रपद के महीने में घर निर्माण, शादी, सगाई, मुंडन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य शुभ कारी नहीं माने जाते हैं. इसलिए इस महीने में स्नान दान को सबसे उत्तम माना गया है. शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद के महीने में कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है और साथ ही कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन पर भी निषेध बताया गया है. 

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भगवान शिव को जल चढ़ाते समय कुछ नियम –

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव को जल चढ़ाते समय कुछ नियमों का ध्यान ज़रूर रखना चाहिए। इसलिए कभी भी जल चढ़ाते समय तेज दारा न अर्पित करें, बल्कि धीरे-धीरे चढ़ाएं और शिव मंत्र का जाप करते रहें। तांबे, कांसे या फिर चाँदी के पात्र में जल लेकर सबसे पहले दाईं ओर चढ़ाएं, जो गणेश जी का स्थान माना जाता है।

शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए क्या नहीं ?

केतकी के फूल
पौराणिक कथा के अनुसार केतकी फूल ने ब्रह्मा जी के झूठ में साथ दिया था, जिससे नाराज होकर भोलनाथ ने केतकी के फूल को श्राप दिया। शिव जी ने कहा कि शिवलिंग पर कभी केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा। इसी श्राप के बाद से शिव को केतकी के फूल अर्पित किया जाना अशुभ माना जाता है।


तुलसी की पत्ती
यूं तो तुलसी की पत्तियां पूजा में काम आती है, लेकिन भगवान शिव की पूजा के लिए नहीं करना चाहिए। भगवान शिव ने तुलसी के पति असुर जालंधरका वध किया था। इसलिए उन्होंने स्वयं भगवान शिव को अपने अलौकिक और दैवीय गुणों वाले पत्तों से वंचित कर दिया।

नारियल का पानी
शिवलिंग पर नारियल अर्पित किया जाता है लेकिन इससे अभिषेक नहीं करना चाहिए। देवताओं को चढ़ाया जाने वाले प्रसाद ग्रहण करना आवश्यक होता है। लेकिन शिवलिंग का अभिषेक जिन पदार्थों से होता है उन्हें ग्रहण नहीं किया जाता। इसलिए शिव पर नारियल का जल नहीं चढ़ाना चाहिए।

हल्दी ना चढ़ाएं
शिवजी के अतिरिक्त लगभग सभी देवी-देवताओं को पूजन में हल्दी गंध और औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है और हल्दी स्त्रियों संबंधित। इसी वजह से शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। 

शंख से जल
दैत्य शंखचूड़ के अत्याचारों से देवता परेशान थे। भगवान शंकर ने त्रिशुल से उसका वध किया था, जिसके बाद उसका शरीर भस्म हो गया, उस भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई थी। शिवजी ने शंखचूड़ का वध किया इसलिए कभी भी शंख से शिवजी को जल अर्पित नहीं किया जाता है।

कुमकुम या सिंदूर
सिंदूर, विवाहित स्त्रियों का गहना माना गया है। स्त्रियां अपने पति की लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना हेतु अपने मांग में सिंदूर लगाती हैं और भगवान को भी अर्पित करती हैं। लेकिन शिव तो विनाशक हैं, यही वजह है कि सिंदूर से भगवान शिव की सेवा करना अशुभ माना जाता है।

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