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जन्माष्टमी विशेष : प्रभु का 56 भोग

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जन्माष्टमी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है, जो भाद्रपद महीने में आठवां दिन होता है।

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 हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में यह पर्व देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कृष्ण जन्मोत्सव के दिन लोग व्रत रखते हैं और रात में 12 बजे कान्हा के जन्म के बाद उनकी पूजा करके व्रत का पारण करते हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान श्री कृष्ण सभी मुरादें शीघ्र पूर्ण कर देते हैं। वहीं महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना के साथ यह व्रत करती हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के पकवान अर्पित किए जाते हैं। उन्हें झूला झुलाया जाता है। 

कृष्ण जन्माष्टमी 2023 कब है? 

पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 6 सितंबर 2023 को दोपहर 03 बजकर 37 मिनट से हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 7 सितंबर 2023 शाम 04 बजकर 14 मिनट पर होगा। 

कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा मध्य रात्रि की जाती है, इसलिए इस साल भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव 6 सितंबर 2023, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान श्री कृष्ण का 5250 वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

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श्रीकृष्ण के 56 भोग की कथा

भगवान श्री कृष्ण को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाने की परंपरा है। भगवान को लगाए जाने वाले इन भोग को अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। जानते हैं आखिर भगवान को क्यों 56 व्यंजनों का भोग लगाते हैं और क्या है इसके पीछे की कहानी और महत्व के बारे में..

वैसे तो भगवान श्री कृष्ण के छप्पन भोग से कई कथाएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पूजा के कराए जाने पर देवराज इंद्र उनसे नाराज हो गए थे। तब उन्होंने बृज वासियों को माफी मांगने पर विवश करने के लिए खूब वर्षा कराई थी। हालांकि बाद में जब इंद्र को भूल का आभास हुआ तो उन्होंने कृष्ण से माफी भी मांगी। देवराज इंद्र के आदेश पर ऐसी ही वर्षा हुई और इससे बृजवासी परेशान हो गए।

बृजवासियों की रक्षा के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपने एक हाथ से उठा लिया और सभी बृज वासियों को इसी पर्वत के नीचे आने को कहा। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने उस समय लगातार 7 दिन तक 7 दिनों तक बिना अन्न जल ग्रहण किए थे। माता यशोदा अपने बाल गोपाल यानी श्री कृष्णा को एक दिन में आठ पहर भोजन कराती थीं। इस तरह से 7 दिनों 8 पहर के हिसाब से मां यशोदा ने उनके लिए बृजवासियों संग मिलकर छप्पन भोग बनाए थे। इसलिए तब से ही भगवना श्रीकृष्ण की पूजा में उन्हें छप्पन व्यंजनों का महाभोग लगाने की परंपरा है।

भगवान श्रीकृष्ण के 56 भोग का नाम

1. भक्त (भात),2. सूप (दाल),3. प्रलेह (चटनी),4. सदिका (कढ़ी),5. दधिशाकजा (दही शाक की कढ़ी),6. सिखरिणी (सिखरन),7. अवलेह (शरबत),8. बालका (बाटी), 9. इक्षु खेरिणी (मुरब्बा),10. त्रिकोण (शर्करा युक्त),11. बटक (बड़ा),12. मधु शीर्षक (मठरी),13. फेणिका (फेनी),14. परिष्टाश्च (पूरी),15. शतपत्र (खजला),16. सधिद्रक (घेवर)17. चक्राम (मालपुआ),18. चिल्डिका (चोला),19. सुधाकुंडलिका (जलेबी),20. धृतपूर (मेसू),21. वायुपूर (रसगुल्ला),22. चन्द्रकला (पगी हुई),23. दधि (महारायता),24. स्थूली (थूली)25. कर्पूरनाड़ी (लौंगपूरी), 26. खंड मंडल (खुरमा), 27. गोधूम (दलिया), 28. परिखा, 29. सुफलाढय़ा (सौंफ युक्त), 30. दधिरूप (बिलसारू), 31. मोदक (लड्डू), 32. शाक (साग) 33. सौधान (अधानौ अचार), 34. मंडका (मोठ), 35. पायस (खीर) 36. दधि (दही), 37. गोघृत, 38. हैयंगपीनम (मक्खन), 39. मंडूरी (मलाई), 40. कूपिका 41. पर्पट (पापड़), 42. शक्तिका (सीरा), 43. लसिका (लस्सी), 44. सुवत, 45. संघाय (मोहन), 46. सुफला (सुपारी), 47. सिता (इलायची), 48. फल, 49. तांबूल, 50. मोहन भोग, 51. लवण, 52. कषाय, 53. मधुर, 54. तिक्त, 55. कटु, 56. अम्ल।

बनाये ये ख़ास भोग और करे कान्हा को प्रसन्न

आटे की पंजीरी

ये चीजें चाहिए:- घी,काजू ,बादाम,आटा,चीनी।

ऐसे करें तैयार

-सबसे पहले आपको एक बर्तन लेना है और फिर इसमें घी गर्म करना है और अब इस घी में आटा डालकर अच्छे से भूल लें

-आटे को तब तक भूनते रहें, जब तक कि ये हल्का ब्राउन न हो जाए। इसके बाद इसे ठंडा करके इसमें चीनी, बादाम, काजू मिला लें और आपकी आटे की पंजीरी तैयार है।

सफेद मक्खन

ऐसे करे तैयार

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-घर पर दूध में लगने वाली मलाई को आपको इकट्ठा करना है और मक्खन बनाने से पहले मलाई को बाहर निकाल लें।

-फूड प्रोसेसर की मदद से मक्खन और छाछ को अलग कर लें, जिसके बाद आपका मक्खन तैयार है और आप इसे भगवान कृष्ण को भोग लगा सकते हैं।

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पंचामृत

दूध, चीनी , दही , घी और शहद को एक साथ मिला लें। इसमें कुछ तुलसी के पत्ते भी डालें। पंचामृत हर हिन्दू त्यौहार में भगवान् को भोग के रूप में लगाया जाता है और प्रसाद के रूप में भक्तो में बात भी जाता है।

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मखाना पाग

एक पैन में घी गरम करलें और उसमे मखाना डालें। चाशनी तैयार करने के लिए दुसरे बर्तन में पानी और चीनी का घोल बनाकर उसमें मखाना फ्राई कर के दाल दें। अच्छे से मिला लें। इस के जम जाने के बाद इसे काट लें।

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कान्हा की कृपा पाने के लिए जन्माष्टमी पर क्या करें

  1. जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते समय उन्हें उनकी प्रिय चीजें जैसे मोरपंख, गाय के दूध से बनी खीर, पंचामृत, मिठाई, मक्खन आदि अवश्य चढ़ाएं.
  2. जन्माष्टमी पर पूजा करते समय शंख का प्रयोग अवश्य करें और इसी के माध्यम से अपने लड्डू गोपाल को स्नान कराएं.
  3. लड्डू गोपाल को भोग लगाते समय तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं.
  4. श्री कृष्ण की पूजा करने के बाद अपनी मनोकामना को मन में कहते हुए झूला जरूर झुलाएं.
  5. जन्माष्टमी के पावन पर्व पर यदि संभव हो तो सारी उनके जन्म होने के खुशी में भजन, कीर्तन एवं जागरण करें.

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