नाग पंचमी
हिंदू धार्मिक मान्यताओं में नाग पंचमी का पर्व बहुत महत्व रखता है ऐसा माना जाता है कि नागपंचमी की तिथि पर नाग देवता की पूजा करने तथा दूध पिलाने से व्यक्ति को जीवन में सर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

नाग पंचमी क्या है
नाग पंचमी नाग देवता का त्यौहार होता है। नाग देवता भोलेनाथ के गले में सुसज्जित होते हैं। इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। माना जाता है कि पूजा करने से सर्प दंश का डर भी दूर होता है और साथ ही सुख समृद्धि की प्राप्ति भी होती है।
नाग पंचमी कब मनाई जाती है
हर साल सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी बड़े धूम धाम से मनाई जाती है। प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के तौर पर मनाया जाता है तथा नाग देवता की पूजा की जाती है।
नाग पंचमी कब है तिथि और समय
इस बार साल 2023 में श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी 21 अगस्त 2023 को पड़ रही है। 21 अगस्त 2023 का दिन सावन के सोमवार का दिन भी है इसलिए इस बार नाग पंचमी का महत्व कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है।
नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है
सावन का महीना शिव का प्रिय महीना होता है जोकि 03 जुलाई 2023 से 31 अगस्त तक है। नाग देवता भगवान शिव के गले में आभूषण की तरह हमेशा ही विराजमान रहते हैं, क्योंकि नाग देवता का संबंध शिवजी से है इसलिए सावन मे नाग पंचमी मनाई जाती है। श्रावण की पंचमी के दिन नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है दरहसल पंचमी तिथी का स्वामी नाग देवता को कहा गया है।
धाार्मिक मान्यता है नाग पंचमी के दिन सर्प पूजन कराने से कुण्डली में व्यात कालसर्प योग से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन सर्प पूजन करने से शिव भगवान एवं नाग देवता प्रसन्न हो जाते हैं घर में सुख समृद्धि का वास होता है।
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नाग पंचमी का महत्व एवं पौराणिक कथाएं
ऐसा माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन नागों की विधि विधान व श्रद्धा भाव से पूजा करने से मनवांछित फल मिलते हैं और यदि इस दिन किसी को नागों के दर्शन हो जाते हैं तो यह बहुत शुभकारी माना जाता है। नाग पंचमी पर सांप को दूध पिलाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पौराणिक ग्रंथो एवं वेदों (चरक संहिता, गरुण पुराण, शिव पुराण) में नाग पंचमी के महत्व का विस्तार से बताया है
नाग पंचमी मनाने का पौराणिक महत्व
1. समुद्र मंथन में वासुकी नाग देवता का योगदान
नाग देवता का आभार प्रकट करने के लिए भी नाग पंचमी मनाई जाती है, क्योंकि समुद्र मंथन के वक्त वासुकी नाग ने ही देवताओं की मदद की थी।
2. शेषनाग है विष्णु भगवान की शैया
पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु अपनी शेषनाग की शैया पर पंचमी के दिन ही विराजित हुये थे। इसी दिन शेषनाग की शैया विष्णु जी ने विश्राम किया था।
3. वासुदेव और शेषनाग का संबंध
भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर, तेज़ आंधी तूफान के मौसम में, उफनती नदी को पार करवाने के लिए शेषनाग ने ही वासुदेव जी की मदद की थी।
4. शेषनाग के फन पर टिकी है धरती
ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है और उस शेषनाग के शैया पर भगवान विष्णु विश्राम करते हैं।
5. जन्मजेय का नाग से बदला
जन्मजेय के पिता को तक्षक सांप ने मार डाला था इसीलिए अर्जुन के पोते जन्मजेय ने नागो से बदला लेने की ठानी और नाग के कुल को समाप्त करने के लिए नाग यज्ञ की व्यवस्था की। तब आस्तिक मुनि ने यज्ञ को रोककर नागो की रक्षा का आग्रह किया और तक्षक नाग ने भी जन्मजेय से माफी मांगी। इससे जन्मजेय का क्रोध शांत हुआ। यह सब घटना सावन महीने के शुक्ल पंचमी के दिन में घटित हुई। इसीलिए सांप के बचाव में इस दिन को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।

नाग पंचमी मनाने के पीछे महत्व एवं कारण
कालसर्प दोष से मुक्ति – ऐसा माना जाता है कि नाग पंचमी पर की जाने वाली पूजा से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि भोलेनाथ सदैव अपने गले में वासुकी नाग को धारण किए हुए रहते हैं इसीलिए नाग पूजा करने से शिव भगवान को प्रसन्न किया जाता है।
सर्पदंश से भय की मुक्ति – बरसात के मौसम में सांप के बिलों में पानी भर जाता है जिसकी वजह से वह अपने स्थान को छोड़कर सुरक्षित स्थान खोजते हैं। इसीलिए भारतीय संस्कृति में सर्पदंश के भय से मुक्ति के लिए भी नाग पंचमी के दिन नाग की पूजा करने की परंपरा शुरू हुई है।
नाग पंचमी पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- घर के मुख्य दरवाजे पर सांप के 8 आकृतियां बनाएं।
- चावल, फूल, रोली, हल्दी आदि चढ़ाकर नाग देवता की पूजा करें।
- नाग देवता को भोग लगा कर कथा अवश्य पढ़ें।
- पूजा के बाद नाग देवता को कच्चे दूध में घी और चीनी मिलाकर जरूर अर्पित करें
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