वैशाली चौमुखी महादेव मंदिर
भगवान शिव का एक अद्भुत मंदिर बिहार के वैशाली में है. यह चौमुखी महादेव शिवलिंग मंदिर है. यह मंदिर बिहार के वैशाली जिले में वैशाली गढ़ से पूर्व दिशा में करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर कम्मन छपरा में स्थित है. इस मंदिर को लेकर कई मान्यताएं हैं. आइए जानते हैं

चौमुखी महादेव मंदिर का इतिहास
वैशाली चौमुखी महादेव मंदिर का इतिहास लगभग 1400 वर्ष पुराना माना जाता है। यह मंदिर अपनी प्राचीनता और महत्वपूर्ण स्थिति के कारण धार्मिक और पौराणिक महत्त्व रखता है।
मंदिर का निर्माण प्राचीन काल में हुआ था, और इसे समय-समय पर नवीनीकरण किया गया है। चौमुखी महादेव मंदिर में चार मुख हैं, जिनमें से प्रत्येक मुख भगवान शिव के विभिन्न रूपों को प्रतिष्ठित करता है। मंदिर का स्थान मान्यता के अनुसार महर्षि जमदग्नि द्वारा चुना गया था, जिसे उनके पुत्र अर्जुन के नाम पर ‘अर्जुन नगर’ भी कहा जाता है।
इस मंदिर में दिन-रात शिवलिंग की पूजा-अर्चना होती है और विभिन्न त्योहारों पर विशेष पूजाएं आयोजित की जाती हैं। श्रद्धालुओं और भक्तों की भक्ति और श्रद्धा यहां की मुख्य धार्मिक गतिविधियों में शामिल होती हैं।चौमुखी महादेव मंदिर वैशाली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।
चौमुखी महादेव का शिवलिंग खुदाई के दौरान मिला था
इस शिवलिंग के मिलने की कहानी भी दिलचस्प है. बताया जाता है कि करीब 120 साल पहले यहां कुएं की खुदाई चल रही थी. इस दौरान यह दुर्लभ शिवलिंग लोगों को दिखा. शिवलिंग देखते ही लोगों ने खुदाई बंद करा दी. कई साल तक इसे यूं ही छोड़ दिया गया. कुछ ग्रामीण शुभ काम से पहले यहां मिट्टी के 5 ढेले रखकर आ जाते थे. इसके बाद यह धीरे-धीरे मंदिर के रूप में आने लगा. उस वक्त इसे ढेलफोरवा महादेव मंदिर का नाम दिया गया था. समय के साथ-साथ इसका नाम बदलता गया. 2013 में इसका नाम चौमुखी महादेव मंदिर रखा गया.
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चौमुखी महादेव मंदिर का निर्माण
मंदिर में चार देव चेहरे, ब्रह्मा, विष्णु, महेश और सूर्य के साथ शिवलिंग है। जबकि निर्माण का समय अज्ञात है, ऐसा माना जाता है कि इसे पांचवीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था। इस मंदिर में चार द्वार हैं जो चारों मुखों की ओर खुलते हैं. चतुर्मुखी महादेव मंदिर की संरचना ऐसे की गई है कि मंदिर के अन्दर आने के बाद आपको सीढियों से नीचे उतर कर गहराई में जाकर चतुर्मुखी शिवलिंग के दर्शन करने होते हैं. चतुर्मुखी शिवलिंग रुपी महादेव आज भी बिलकुल उसी जगह स्थित हैं जहाँ वे प्रकट हुए थे.
चौमुखी महादेव मंदिर का मान्यता और श्रावन मास में कांवरियों भीड़ और मेला
माना जाता है कि चतुर्मुखी महादेव अपने दर्शनों के लिए आने वाली सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते है. उनके मंदिर से कोई खाली हाथ नहीं लौटता. धार्मिक मान्यताओं के अलावा यहाँ पुरातात्विक महत्त्व होने के कारण चतुर्मुखी महादेव मंदिर देशी और विदेशी पर्यटकों के भी आकर्षण का केंद्र है. श्रावन मास में कांवरियों द्वारा किये जाने वाले अर्चन-पूजन के साथ-साथ यहाँ सामान्य दिनों में भी पूजन के लिए काफी भीड़ होती है जिसके कारण प्रशासन तथा मंदिर समिति द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की गई है. पूजन के साथ-साथ यहाँ शादी-विवाह भी संपन्न कराए जाते हैं. यह भी माना जाता है कि वैशाली आने वाला कोई भी व्यक्ति चतुर्मुखी महादेव के दर्शन किये बिना नहीं जाता. ऐसा माना जाता है कि चतुर्मुखी महादेव मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर और बैद्यनाथ धाम, देवघर के बिलकुल मध्यबिंदु पर स्थित है.

केवल श्रद्धा और विश्वास ही नहीं, बल्कि अपने भौगोलिक और पुरातात्विक महत्त्व के कारण भी चतुर्मुखी महादेव मंदिर देश की धरोहर है.
श्रावन मास में प्रति सोमवार को महादेव का विशेष श्रृंगार
इस वर्ष श्रावण मास में करीब 8 सोमवार है। श्रावण मास में जितना महत्व शिव पूजन का है, उतना ही महत्व नर्मदा स्नान का भी है नर्मदा से जल भर कर पैदल यात्रा करते है। कई कावड़ यात्री पूरे समूह के साथ कावड़ यात्रा निकालते है। प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिरों में शिवलिंग का पूजन अर्चन एवम अभिषेक भी करती है।
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