राजगीर मलमास मेला

मलमास के दौरान मेला कहां लगता है
पूरे भारतवर्ष में केवल राजगीर में ही मलमास मेला का आयोजन किया जाता है। इसे ‘पुरुषोत्तम मास’ के नाम से भी जाना जाता है।
मलमास के दौरान मेला कब लगता है
33 कोटी देवी-देवता 1 महीने तक राजगीर में ही प्रवास करेंगे। 18 जुलाई से 16 अगस्त तक 1 महीने तक चलने वाले पुरुषोत्तम मास मेला की शुरुआत हो गई है।
बिहार का विश्व प्रसिद्ध राजगीर मलमास मेला
भारतीय पंचाँग के अनुसार प्रत्येक तीसरा साल तेरह महीनों का होता है जिसे अधिमास या मलमास भी कहते है। ऐसी मान्यता है कि यह मास बहुत ही पवित्र माना जाता है। और हिन्दुओं के सभी देवी देवता इस अधिमास में राजगीर में विचरण करते हैं। 33 करोड़ देवी देवता को प्रसन्न करने हेतु एवं वांछित फलों के प्राप्ति हेतु तीर्थ यात्री पूरे मास यहाँ प्रवास करते है। इस अवसर पर यहाँ बहुत बड़े मेले को आयोजन किया जाता है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं और पूचा अर्चना के पश्चात् मेले का आनन्द उठाते है। हिन्दु धर्म से संबंधित सभी साधु-मुनि का गढ़ मलमास मेले में रहता है। यहाँ 24 घंटे धार्मिक संगठनों द्वारा लंगर की भी व्यवस्था रहती है। धार्मिक प्रवचनों एवं पूजा पाठ से यह नगरी एक मास तक श्रद्धलुओं से पटी रहती है। इस अवसर पर यहाँ विदेशी पर्यटकों का भी जमावड़ा रहता है।
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राजगीर में 22 कुंडों और 52 जलधाराओं की उत्पति
वायु पुराण के मुताबिक भगवान ब्रह्मा के पौत्र राजा बसु ने इसी मलमास महीने के दौरान राजगीर में ‘वाजपेयी यज्ञ’ करवाया था। जिसमें सभी 33 करोड़ देवी देवाओं को आने का न्योता दिया। इस दौरान काग महाराज को छोड़कर बाकी सभी देवी देवता वहां पधारे। यज्ञ में पवित्र नदियों और तीर्थों के जल की जरूरत पड़ी थी। इस दौरान देवी देवताओं को एक ही कुंड में स्नान करने में परेशानी होने लगी। तभी ब्रह्मा जी ने राजगीर में 22 अग्निकुंडों के साथ 52 जल घाराओं का निर्माण कराया ।
बह्मा जी ने किन 22 कुंडों का निर्माण कराया
ब्रह्मकुंड, सप्तधारा, व्यास, अनंत, मार्केण्डेय, गंगा-यमुना, काशी, सूर्य, चन्द्रमा, सीता, राम-लक्ष्मण, गणेश, अहिल्या, नानक, मखदुम, सरस्वती, अग्निधारा, गोदावरी, वैतरणी, दुखहरनी, भरत और शालीग्राम कुंड। जिसमें ब्रह्मकुंड का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस रहता है।
कहां से आता है इस कुंड में पानी
बताया जाता है कि यहां सप्तकर्णी गुफाओं से पानी आता है। यहां वैभारगिरी पर्वत पर भेलवाडोव तालाब है, जिससे ही जल पर्वत से होते हुए यहां पहुंचता है। इस पर्वत में कई तरह के केमिकल्स जैसे सोडियम, गंधक, सल्फर हैं। इसकी वजह से पानी गर्म होता है।

मलमास मेला के दौरान राजगीर में क्यों नहीं दिखता है काग
वायु पुराण के मुताबिक वाजपेयी यज्ञ में काग महाराज को छोड़कर बाकी सभी देवी देवता इसमें शरीक हुए थे। क्योंकि राजा बसु ने भूलवश काग महाराज को न्योता देना भूल गये थे। इसके कारण महायज्ञ में काग महाराज शामिल नहीं हुए। उसके बाद से मलमास मेले के दौरान राजगीर के आसपास काग महाराज कहीं दिखायी नहीं देते हैं।
पिंडदान का है विशेष महत्व
मलमास के दौरान जिनका निधन हो जाता है, उनका पिंडदान केवल राजगीर में ही होता है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए यहां पिंडदान, तर्पण विधि और श्राद्ध कर्म वैतरणी नदी पर किए जाते हैं। हिंदू धर्म में वैतरणी नदी का विशेष महत्व है। पौराणिक धर्म ग्रंथों में खासकर राजगीर के पुरुषोत्तम मास मेले में भवसागर पार लगाने वाली नदी वैतरणी का महत्वपूर्ण उल्लेख मिलता है।
पापों से मिलती है मुक्ति
राजगीर की परंपरा के अनुसार, पुरुषोत्तम मास मेले के दौरान गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी नदी पार करने पर मोक्ष व स्वर्ग की प्राप्ति होती है और व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। वहीं जाने अनजाने में हुए पाप से मुक्ति के साथ-साथ सहस्त्र योनियों मे शामिल नीच योनियों से भी मुक्ति मिल जाती है।

राजगीर का है धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
पौराणिक वैतरणी नदी का इतिहास काफी गौरवमयी व समृद्धशाली रहा है। मलमास मेले के दौरान भारत के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां गर्म कुंड के साथ साथ वैतरणी नदी में स्नान करते हैं। पुरोहित यहां एक माह तक गाय के बछड़ा को लेकर रहते हैं। राजगीर का धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों ही महत्व है। राजगीर कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। साथ ही मौर्य साम्राज्य का उदय भी यहीं से हुआ था।
कैसे पहुंचे राजगीर
हवाई मार्ग (By Air)– सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पटना (107 किमी)।
रेलमार्ग (By Train)– आपको पटना, गया, दिल्ली, कोलकाता, मुगलसराय आदि जगहों से ट्रेन मिल जाएगी । जैसे श्रमजीवी एक्सप्रेस, सारनाथ एक्सप्रेस, दानापुर राजगीर पैसेंजर, राजगीर-दानापुर इंटरसिटी। गया-बख्तियारपुर इंटरसिटी
सड़क मार्ग (By Road) पटना, गया, दिल्ली और कोलकाता से आपको राजगीर के लिए आसानी से बसें मिल जाएंगी। राजगीर के लिए कई टैक्सी और एसी बसें भी चलती हैं।
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