डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, भारतीय गणराज्य के पहले राष्ट्रपति और एक प्रमुख दार्शनिक थे। उन्होंने 1952 से 1967 तक भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला। राधाकृष्णन एक प्रमुख शिक्षाविद, दार्शनिक, और लेखक भी थे। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को विश्व के सामने प्रस्तुत किया और उनके द्वारा लिखे गए ग्रंथ दार्शनिक विचारों को प्रस्तुत करते हैं।
उनकी जीवनी “जीवन और उसका मार्ग” ने उनकी गुणवत्ता और सांस्कृतिक योगदान को प्रमोट किया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और उन्होंने भारतीय शिक्षा को नए ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना देखा।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन – जीवन परिचय
1. प्रस्तावना:
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था।
2. शिक्षा और प्रारंभिक जीवन:
उन्होंने तिरुपति और मद्रास विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने फिलॉसफी और धर्मशास्त्र में अपनी पढ़ाई की और उनका शिक्षा करियर शुरू हुआ।

3. शिक्षान और प्रोफेसर:
डॉ. राधाकृष्णन ने उच्च शिक्षा में करियर बनाया और शिक्षान बनकर अपनी सरकारी करियर की शुरुआत की। उन्होंने अंग्रेजी और धर्मशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाए और प्रशासनिक भूमिकाओं का भी निर्भर किया।
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4. फिलॉसफर और लेखन:
डॉ. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक थे और उन्होंने भारतीय दर्शन, विज्ञान, और धर्म के मुद्दे पर कई पुस्तकें लिखी। उनकी पुस्तक “भारतीय दर्शन” महत्वपूर्ण है और उन्होंने विश्वभर में अपने दर्शनिक विचारों का प्रचार किया।
5. पोलिटिकल करियर:
उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय गांधीजी के साथ काम किया और स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन किया। उन्होंने पूना के उपराज्यपाल के रूप में भी कार्य किया और भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

6. भारतीय गणराज्य के पहले उपराष्ट्रपति:
डॉ. राधाकृष्णन ने 1952 में भारतीय गणराज्य के पहले उपराष्ट्रपति के रूप में चुनाव में भाग लिया और पदभार संभाला। उन्होंने अपने पदकाल के दौरान शिक्षा और सांस्कृतिक मुद्दों पर ध्यान दिया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को बढ़ावा दिया।
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7. महान विचारक और विश्वदूत:
डॉ. राधाकृष्णन ने अपने जीवन में विचारशीलता को महत्वपूर्ण माना और विश्वभर में भारतीय संस्कृति को प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय दर्शनों को पश्चिमी दुनिया में प्रस्तुत करने के लिए विश्वभर में यात्राएँ की और भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

8. निधन:
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का निधन 17 अप्रैल 1975 को हुआ, लेकिन उनके विचार और योगदान आज भी याद किए जाते हैं।
9. संक्षिप्त आंशिक:
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भारतीय समाज को शिक्षा, धर्म, और दर्शन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सोचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति और तात्त्विकता के माध्यम से विश्व शांति और समृद्धि की दिशा में अपना योगदान दिया।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान भारतीय विचारक, शिक्षाविद, और राजनेता थे, जिनका योगदान आज भी देश और विश्व के लिए महत्वपूर्ण है।
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