कांटी से विधायक इजरायल मंसूरी बिहार के नए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री हैं। पहली बार वो 2020 में विधानसभा चुनाव जीते थे। केबल ऑपरेटर से मंत्री पद तक पहुंचे इजरायल मंसूरी एनडीए प्रत्याशी मोहम्मद जमाल को हराए थे। पार्टी ने उन्हें इसका इनाम दिया और तोहफे में मंत्री पद मिला है।
मुजफ्फरपुर : कहते हैं नसीब जिसके साथ हो उसे आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। कुछ ऐसा ही दिखा, कांटी से राजद विधायक इजराइल मंसूरी के साथ। एक मामूली केबल ऑपरेटर के तौर पर जिंदगी की शुरुआत की। तंगहाली से बचते-बचाते इजराइल मंसूरी मुखिया का चुनाव जीत गए। इसी बीच नीतीश कुमार के विचारों में विश्वास जताकर जदयू में शामिल हो गए, हालांकि ये सफर बहुत लंबा नहीं खींचा।

JDU से RJD में आए थे इजरायल मंसूरी
वैसे, सियासी जगत में पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के नजदीकी रहे। बाद के दिनों में इजराइल मंसूरी ने जदयू से इस्तीफा भी दे दिया और राजद में शामिल हो गए। उन्हें राजद के प्रदेश कमेटी में जल्द ही प्रदेश महासचिव बना दिया गया। इस बीच इजराइल मंसूरी राजद के कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। पार्टी में कद भी बढ़ता गया। 2020 चुनाव में पार्टी ने उम्मीदवार भी बना दिया। कांटी विधानसभा क्षेत्र के लिए राजद का सिंबल मिला। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे मंसूरी ने कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री निर्दलीय इंजीनियर अजीत कुमार और राजग प्रत्याशी मोहम्मद जमाल को हराकर विधानसभा पहुंचे।
महागठबंधन सरकार में खुली किस्मत
हालांकि बिहार में राजग की सरकार बन जाने से राजद विधायकों का कोई बहुत बड़ा मोल नहीं दिख रहा था। डबल इंजन की सरकार के इस तरह गिर जाने का किसी को आशंका भी नहीं थी। तेजी से बदले घटनाक्रम में राजग में दरार पड़ गया। नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू ने यूटर्न लेते हुए बिहार में आरजेडी के साथ मिलकर सरकार बना ली।
पहली बार में ही मंत्री बन गए मंसूरी
चाचा-भतीजे की इस जोड़ी ने जो कैबिनेट तय की उसमें कांटी से राजद विधायक इजराइल मंसूरी को भी ओहदा मिला। बिहार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री का पद हासिल हुआ। इस तरह वे जदयू विधायक रहे अर्जुन राय के बाद पहले ऐसे विधायक बने जो पहली ही कोशिश में निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे और उनके सिर पर मंत्री का ताज भी आ गया। इसे कहते हैं किस्मत और समर्पित कोशिशों का सम्मान।