सुंदर नाथ मंदिर
सुंदरनाथ भगवान शिव का एक मंदिर है जो नेपाल की सीमा के पास भारतीय राज्य बिहार के कुर्साकांटा अररिया में सुंदरी मठ (सुंदरनाथ धाम) में स्थित है। दक्षिण नेपाल और उत्तरी बिहार के लोग हिंदू भगवान शिव की पूजा करते हैं। बिहार के अंग प्रदेश क्षेत्र में भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर ।

सुंदर नाथ मंदिर का निर्माण कब हुआ
साल 1930 तक इस धर्मस्थल पर नागा बाबाओं का कब्जा था। स्थानीय लोगों ने नागा बाबाओं से इस स्थल को मुक्त कराया। साल 1935 में पूर्णिया जिले के गढ़बनैली के राजा स्व. कुलानंद सिंह ने यहां मंदिर निर्माण कराया।विधायक विजय कुमार मंडल कुछ स्थानीय लोगों के साथ मिलकर वर्ष 2012 में यहां भव्य व आकर्षक मंदिर बनवाने का कार्य शुरू किया।
वर्ष 2016 में ग्यारह सदस्यीय समिति बनाकर बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद बिहार, पटना से निबंधन कराया गया। इस समिति का नाम पर्षद ने ‘सुन्दरी मठ न्यास समिति रखा।
सुंदर नाथ मंदिर का इतिहास
इसके इतिहास के बारे में बात करें तो कहा जाता है की यहाँ का इतिहास महाभारत काल से जुड़ी जुड़ा हुआ है। अज्ञातवास काल में भगवान श्री कृष्ण के आदेश पर भीम एरावत हाथी पर 108 कमल पुष्प लाये। इससे माता कुंती ने पांडवों संग बाबा सुन्दरनाथ व माता पार्वती की पूजा की थी।

जो भी भक्त सच्चे दिल से अपनी समस्या लेकर यहाँ भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं व जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, हवन, जाप आदि करवाते हैं, बाबा सुन्दरनाथ उनकी समस्या हर लेते हैं।
इसी मंदिर के परिसर में स्थित माता पार्वती मंदिर सुहागिन महिलाओं के लिये आस्था का केंद्र बन गया है। माता पार्वती की पूजा कर सुहागिन महिलायें सदा सुहागन होने की कामना करती हैं। विशेष कर जिन महिलाओ की नै शादी हुई है वो माँ पार्वती के दर्शन के लिए जरूर आती हैं ।
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सुंदर नाथ मंदिर पूर्णिमा उत्सव
हर पूर्णिमा को हजारों भक्त इस स्थान पर आते हैं और भगवान शिव (बाबा सुंदरनाथ) की पूजा करते हैं। मक्कार मेला हर साल मकर संक्रांति के पहले रविवार से शुरू होकर महीने के अगले चौथे या पांचवें रविवार तक चलता है। ‘मालधारी’ व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी शुरुआत महा शिवरात्रि से होती है और यह 15 से 20 दिनों तक चलता है. भारत और नेपाल से भी हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं। मंदिर को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए विकास कार्य जारी है।
प्रतिवर्ष यहां 15 दिवसीय महाशिव रात्रि और सावन पूर्णिमा के अवसर पर लगभग 8 से 10 लाख लोग जलाभिषेक करते हैं। हर वर्ष सैकड़ों विवाह, एक लाख से अधिक मुंडन संस्कार होता है। सैकड़ों की संख्या में धार्मिक अनुष्ठान होता है।

सुंदर नाथ मंदिर कैसे पहुंचें
रेलवे: ट्रेन सुविधा ब्रॉड गेज ट्रैक के रूप में है।
सड़क मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग 57 से जुड़ा हुआ है। अधिकांश जिलों और आंतरिक ब्लॉकों के लिए बसें बस टर्मिनल से उपलब्ध हैं।
हवाई अड्डा: निकटतम हवाई अड्डा बागडोगरा हवाई अड्डा है।
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